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Friday, May 01, 2026

नेपाली PM बालेन शाह 1 साल तक नहीं करेंगे विदेशी दौरा, भारत को झटका! पीएम मोदी ने भेजा था न्योता...See more

नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) कम से कम एक साल तक किसी भी विदेशी दौरे पर नहीं जाएंगे। नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के एक नेता ने यह जानकारी दी है। RSP के महासचिव भूप देव शाह ने नेपाली न्यूज चैनल कांतिपुर टीवी पर एक इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री की एक साल तक किसी भी विदेशी यात्रा पर जाने की योजना नहीं है। बालेन शाह का यह कदम भारत के लिए झटका है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च में शपथ लेने के तुरंत बाद शाह को बधाई दी थी और भारत आने का न्योता दिया था।

नेपाल में 1990 में बहुदलीय लोकतंत्र की बहाली के बाद नेपाली विदेश मंत्रियों को विदेश यात्राओं में काफी जल्दबाजी करने के लिए जाना जाता रहा है। केपी शर्मा ओली के पिछले प्रधानमंत्री कार्यकाल तक भारत ही सर्वमान्य पहला पड़ाव हुआ करता था। साल 2014 के बाद से, छह में से पांच प्रधानमंत्रियों ने सबसे पहले भारत का ही दौरा किया है।

नेपाल की विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री शाह का कम से कम एक साल तक कोई भी विदेशी दौरा न करने का फैसला विदेश नीति में किसी बड़े बदलाव को नहीं दिखाता, लेकिन निश्चित रूप से विदेशी संबंधों के प्रति एक सतर्क नजरिए का संकेत देता है।

विदेश नीति के एक्सपर्ट चंद्र देव भट्ट ने काठमांडू पोस्ट से बातचीत में कहा कि नेपाली के प्रधानमंत्री पद संभालते ही विदेश यात्राओं पर निकल पड़ने के लिए कुख्यात रहे हैं। प्रधानमंत्री शाह का नजरिया परिपक्वता का स्तर दिखाता है, जो नेपाली राजनीति में आमतौर पर देखने को नहीं मिलता है। भट्ट ने आगे कहा कि बालेन शाह ने संकेत दिया है कि वह विदेश यात्राओं के बजाय घरेलू मुद्दों को अधिक प्राथमिकता देते हैं।

RSP महासचिव भूप देव शाह के हवाले से काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान सरकार में अपनी कार्यकारी भूमिका पर ही रहेगा। भूप देव ने साफ किया कि प्रधानमंत्री पार्टी के अंदरूनी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बजाय उसकी कार्यवाही पर आम नागरिक की तरह ही नजर रखेंगे। यह भी नेपाल की राजनीति में ऐसा कम ही होता है।

साल 2011-2013 में बाबूराम भट्टरई के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से ही सत्ताधारी पार्टियों के अध्यक्ष की प्रधानंत्री का पद संभालते आए हैं। खिल राज रेगमी (2-13-2014) और सुशीला कार्की (2025-2026) इसके अपवाद रहे। इन दोनों ने चुनाव के दौरान बनी सरकारों का नेतृत्व किया। लेकिन RSP का फैसला 'एक व्यक्ति, एक पद' की व्यवस्था के हिस्से के तौर पर दिखाई देता है।
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