कोरोना इफेक्ट: #सो_गई_है_सारी_मंजिले_सो_गया_है_रस्ता
◆ राँची में 80 करोड़ का कपड़ा व्यापार अब हो रहा है 25 करोड़ में
राँची (Yello_Tv_न्यूज़) : राजधानी के कपड़ा व्यवासायियो के सामने खड़ी हो गई है बड़ी मुसीबत। भले ही केंद्र सरकार ने दुकानें और प्रतिष्ठानों को खोलने की अनुमति दे दी है, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार की होने की संभावना दूर-दूर तक फिलहाल तो नही दिख रही है। खासकर कपड़ा के कारोबार पर कोरोना का बहुत बुरा असर पड़ा है.
◆ बता दें कि राजधानी रांची में सिर्फ होलसेल और रिटलेर मिला कर 3000 दुकानें हैं. इनमें रांची के आसपास के इलाके भी जैसे हटिया, नामकुम के कपड़ा व्यवसायी भी शामिल हैं.
◆ अपर बाजार स्थित #फैशन_वर्ल्ड के संचालक श्री सलूजा से हमारे संवादता ने जब बात की तब उनका भी दर्द छलक कर बाहर आया । उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के उपरांत बाजार खुलने के बाद भी हमारा व्यपार बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। कोरोना के डर से न कोई ग्राहक आने को तैयार है और न ही स्टाफ और तो और अब त्योहार और समारोहों के आयोजन नहीं होने से बाजार और भी ज्यादा प्रभावित है. ईद हो या लगन, सभी स्टॉक बबार्द हो गये. व्यापारियों को जबर्दस्त नुकसान हो रहा है। रिटेलरों का तो सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत कारोबार हो रहा है. पहले त्योहार-आयोजन होते थे तो लोग खरीदारी करते थे. लेकिन अब किसी तरह का कोई आयोजन नहीं होने से बाजार बुरी तरह प्रभावित है. उन्होंने बताया कि जो लोग फैशन के लिए कपड़े खरीदते थे उनलोगों ने भी बाजार से अपना मुंह मोड़ लिया है।
◆ कपड़ा व्यवसायी थोक विक्रेता संघ के अध्यक्ष अनिल जालान की मानें तो कारोबार 30 प्रतिशत रह गया है. ग्राहकों की कमी सबसे बड़ी समस्या है. पहले के स्टॉक गोदाम में पड़े हैं. ईद और लगन के कपड़ों को अब बेचा नहीं जा सकता. वाहनों की कमी के कारण नया माल आ नहीं रहा. यातायात सुविधाएं रहतीं तो गांवों से लोग खरीदारी करने शहर आते. व्यवसायियों का कहना है कि बड़े होलसेलरों में यहां 30 प्रतिशत कारोबार हो रहा है. वहीं छोटे दुकानों में यह 10 प्रतिशत है. ऐेसे में दुकान के किराया से लेकर लोन देना काफी मुसीबत भरा है.
◆ राजधानी में कपड़े का 80 करोड़ का कारोबार हर महीने किया जाता था. लॉकडाउन के बाद से यह ठप है. दिन भर में एक्का दुक्का लोग आते हैं. होल सेलरों से लेकर रिटेलर तक परेशान हैं. राजधानी में होलसेल की 155, होजियरी की 125, स्कूल ड्रेसों की 175 दुकानें हैं. रिटलेरों की संख्या लगभग 2500 है. हालांकि छोटे कारोबारियों की दुकाने बंद होने की खबर अब तक नहीं है. लेकिन व्यवसायियों ने माना कि कुछ व्यवसायी दुकान बंद करने के कगार पर है. व्यवसायियों ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी किराया और लोन चुकाने की है. पहले जहां एक से दो लाख तक करोबार हर महीने होता था. वहीं अब 20 से 25 हजार तक का करोबार है. ऐसे में लोन नहीं चुकाया जा सकता है. पहले के जो स्टॉक थे वो भी खराब हो गये.
◆ स्कूल ड्रेस दुकानदारों की स्थिति बहुत खराब
व्यवसायियों से बात करने से पता चला कि सिर्फ स्कूल ड्रेस बेचनेवाले दुकानदारों की स्थिति बहुत खराब है. स्कूल बंद हैं. लोग ड्रेस नहीं खरीद रहे हैं. ये बंदी के कागार पर हैं. महामारी की स्थिति नहीं होती तो सिर्फ स्कूल ड्रेस से करोड़ों का कारोबार होता. विशेष कर फरवरी से अप्रैल महीने के दौरान. व्यवसायियों का कहना है कि स्थिति कब सुधरेगी नहीं पता, लेकिन वर्तमान स्थिति बदतर है.





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